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शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2010

वो मेरे प्रेरणा श्रोत और जर्मनी के एकीकरण की २० वीं वर्षगाँठ

 

मैं मेट्रो ट्रेन के स्टेशन पर अपने प्रोग्रामिंग वाली चिंतन मुद्रा में खडा था और तभी एक छड़ी ने हलके से मेरे पैर को छुआ,  और जैसे मेरे दार्शनिक भावों को एक तरंग सी दे दी.  छड़ी वाला इंसान उस भीडभाड वाले छोटे से प्लेटफोर्म पर सर्राटे से आगे बढता जा रहा था, आँखों पर काला चश्मा और हाथों से बस छड़ी को एक दिशा देते हुए स्वाभिमानवस वो आगे बढा जा रहा था, किसी की कोई सहायता की उसे दरकार नहीं थी, आवश्यकता ने उसे एक मन्त्र दे दिया था कि बस बिना रुके चलते ही जाना है , अगर किसी की तरफ देखेगा तो आगे उस वेग से बढ़ने का प्रश्न ही नहीं है !

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ऐसी कितनी ही छोटी छोटी बातें हैं जो आपको एक मंद हवा के झोंके से आनन्दित सा कर देतीं हैं , और इस आनंद के पीछे कितनी पीड़ा को छुपाये ये पुलकित प्रतीक !

गाँव में एक हष्टपुष्ट मेरे साथ का लडका,  मेरे से भी अधिक फुर्तीला,  बस शायद कुछ अभावों की वजह से पढ़ ना सका और गाँव में ही रह गया ! लोग कभी उसे उसके नाम से नहीं बुलाते बल्कि लंगड़ा कहकर बुलाते हैं, इसी नाम से मशहूर है पर जिस वेग से पाँवई लेकर एक पैर से दौडता है  उससे लगता है कि उसमें आसमा को छूने की चाहत और क्षमता दोनों ही है ! गाँव में उसकी दूकान है और खुद का छोटा सा व्यवसाय - कोई क्या बराबरी करेगा उसकी - लंगड़ा कहने वाले खुद ही उसके पुरुषार्थ से लज्जित हो जायें अब !

पिछले महीने ३ अक्टूबर को पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी को एकीकृत हुए २० साल हो गये ! (शायद दीवाल ९ नवम्बर १९८९ की रात को गिराई गयी ) दोनों देशों ने एक होकर संगठित होकर केवल दूसरों के आधिपत्य से ही उस दिन मुक्ति नहीं पायी बल्कि विश्व में एक प्रगति के सोपानों का कीर्तिमान भी कायम किया, एक होने के बाद जर्मनी विश्व के ऐसे देशों में शामिल हो गया जो विश्व की आर्थिक महाशक्ति कहे जाते हैं, १७ साल से बेरोजगारी की दर विश्व में सबसे कम रखकर इन्होने कर्मशीलता के साथ योजनबद्ध और एक कर्मण्य प्रशाशनिक व्यवस्था होने का प्रतीक भी विश्व को दिया !  पूर्वी जर्मनी उतनी संपन्न नहीं थी जितनी पश्चमी और इसलिए केवल १७ प्रतिशत पूर्वी जर्मनी की कम्पनियाँ ही प्रतिस्पर्धा में टिक पायी, पर बाद में सरकार की प्रतिबद्धशीलता की दाद देनी होगी कि अब पूर्व और पश्चिम में भेद कर पाना संभव ही नहीं !   ब्लूमबर्ग पत्रिका ने इस पर एक विशेष आलेख प्रकाशित किया है जिसने मेरी पिछले वर्ष की जर्मन यात्रा की यादें ताजा कर दीं !  मैं उन दिनों  ड्यूसलडोर्फ़ में था,  कुछ चीजें जो मैंने अनुभव कीं और पत्रिका ने भी इंगित करीं हैं  -

  • अगर आपका जन्मदिन है तो ये आपकी जिम्मेदारी है कि आप ड्रिंक और खाना खुद उपलब्ध कराएं 
  • हमेशा समय के पाबन्द रहें
  • सिगरेट को कभी भी कैंडल से नहीं सुलगाएँ, (A common superstition says doing so kills a sailor)
  • अमेरिका और भारत से फ्री के बाथरूम की आदत पड़ हो गयी तो यहाँ उसको विराम दें , बाथरूम से बाहर आकर टिप जरूर दें
  • मैं तो एक बार लेडिस बाथरूम  में घुस गया क्यूंकि पुरुषों के बाथरूम पर herr और औरतों के बाथरूम पर कुछ और लिखा रहता है तो मुझे लगा कि her  का मतलब वो महिलाओं का बाथरूम होगा :)
  • herr का मतलब शायद mr.  या श्री होता हैं जो किसी भी पुरुष के नाम के संबोधन के पहले सम्मानसूचक शब्द के रूप में लगाया जाता है
  • बीयर तो पानी की तरह है इस देश में :-)
  • खाना खाते समय हाथ टेबल पर रखेंगे तो अच्छा माना जाता है
  • खाना अगर पूरी तरह पेट भर कर खा लिया है और नहीं लेना है तो अपने खाने के चाक़ू और फोर्क को और चम्मच को समानांतर अवस्था में रखे , अगर क्रोस्सिंग में रखोगे तो इसका मतलब आपको और खाना खाना है
  • किसी के घर जाओ तो समय से ही पहुँचो और एक छोटी से गिफ्ट जरूर ले जायें 
  • एक सायिकल जरूर लें लें, सायकिल तो जैसे होलैंड और जर्मनी के रोजमर्रा के जीवन का एक हिस्सा हैं, सूट पहने लोग सायकिल पर ऑफिस जाते मिलेंगे सुबह, कुछ ५० यूरो से लेकर हजारों यूरो तक की सायकिल उपलब्ध हैं
  • एक शहर की बीयर को दूसरे शहर में न मांगे, बीयर के ऊपर बहुत लड़ाईयां रहती हैं,  ड्यूसलडोर्फ़ शहर में आल्ट बीयर चलती थी और कालोन शहर में कोल्च , पर ड्यूसलडोर्फ़  में १-२ रेस्तरां ही कोल्च परोसते थे और यही हाल कालोन में था आल्ट के बारे में. दोनों शहरों में दूरी थी ३० किलोमीटर, जर्मन दोस्त ने ड्यूसलडोर्फ़  के रेस्तराओं में हम लोगों को कोल्च न माँगने के लिए आगाह किया हुआ था  …हामरे गाँव के कुए से पानी न पी लेना सरदार !!

यूरोप तो जैसे स्वर्ग हो और  जर्मनी उस स्वर्ग का द्वार व मुखिया !  कुछ उन दिनों के फोटो -

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आपके अनुभव आपके प्रेरणाश्रोत और जर्मनी के बारे में कैसे हैं ?  जर्मनी के एकीकरण की  २० वीं वर्षगांठ पर आपके क्या विचार हैं ? 

10 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

काफ़ी अच्छा आलेख। बहुत सी नई जानकारी मिली। एक होकर और दृढता मिली है। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
पक्षियों का प्रवास-२, राजभाषा हिन्दी पर
फ़ुरसत में ...सबसे बड़ा प्रतिनायक/खलनायक, मनोज पर

Arvind Mishra ने कहा…

जर्मनी के आचार व्यवहार की अच्छी जानकारी

Vivek Rastogi ने कहा…

जर्मनी के इस एकीकरण से हमें सीख लेनी चाहिये, और पहली बार जर्मनी के बारे में इतना विस्तृत जानने को मिला है।

राम त्यागी ने कहा…

@मनोज कुमार जी, खुशी हुई कि लेख आपको पसंद आया और इसने एक शिक्षा का काम भी किया !

राम त्यागी ने कहा…

@अरविन्द, विवेक जी , अच्छा लगा जानकार कि आपको जर्मनी के बारे में जानकार अच्छा लगा, जर्मनी में हिन्दुस्तान में काफी समानताएं हैं और कभी कभी लगता है कि भारत में अनुशाशन आ जाए और रिश्वतखोरी पर अंकुश लग जाए तो हम भी जर्मनी की तरह विश्वा मानचित्र पर प्रगति के सोपान हर क्षेत्र में लिख रहे होंगे

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जर्मनी जाने के पहले आपकी पोस्ट पुनः पढ़ी जायेगी।

VIJAY KUMAR VERMA ने कहा…

bahut hee achchhee jankaree mili jarmanee ke bare me ...ak vicharotejak aalekh ke liye badhai

abhi ने कहा…

ये बात अपने कुछ दोस्तों को बताता हूँ की वहां "बीअर पानी की तरह उपलब्ध है" :) सब भाग के वहीँ चले जाएंगे...

मजा आ गया जर्मनी की यात्रा कर के...

"फील गुड पोस्ट" :)

Sanjeet Tripathi ने कहा…

bhai sahab, aapne to kaafi kuchh jankariyan de di germny ke bare mein,

shukriya aapka.

kash desh vaisa hi apna bane lekin us se pahle ham vaise deshwasi.....

राम त्यागी ने कहा…

@संजीत जी, हर देश के अपनी खूबियां और बुरे होती हैं. भारत को बिलकुल जर्मनी जैसे होने की जरूरत नहीं है , पर हाँ हम कुछ तो उनसे सीख ही सकते हैं और वो हमसे !

@Abhi, सही कहा तुमने :-)