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बुधवार, 13 अक्टूबर 2010

मुझे मानव होने पर गर्व है आज !!!

हिम्मत और साहस, आनंद और हर्ष, गर्व और संतुष्टि के भाव केवल उन ३३ लोगों के चहरे पर ही नहीं बल्कि पूरे चिलिवासियों के चेहरे पर गर्वानुभूति के भाव थे !  ये ऐतिहासिक पल था जब ६९ दिन २३०० फीट जमीन में दबे रहने के बाद ३३ लोग स्वस्थ और सकुशल बाहर आ गए !
जब आदमी चाँद से जाकर वापस आया, या फिर पहली अन्तरिक्ष यात्रा के बाद जमीन पर  वापस आया या फिर जैसी संतुष्टि और गर्व जन गन मन गा कर मिलती है , वैसी ही कुछ अनुभूति इस सभ्य मानवीय प्रयास पर मेरे मन को हुई ! 

मैं निकुंज से अक्सर कहा करता हूँ कि 'never cry, always try'  और ये शायद में अब और भी संबल के साथ कह सकता हूँ,  इस दुनिया में प्रयास करने से क्या संभव नहीं हैं,  बस अनवरत लगातार नदी की तरह बहने की जरूरत है, मंजिल मिलती ही जाती है !   चिली के राष्ट्रपति के चेहरे पर प्रसन्नता और स्वाभिमान के भाव  हजारो चिलिवासियों के दृढ निश्चय को व्यक्त कर रहे थे !

सारी दुनिया आज चिली के इस प्रयास को एक सम्मान और एक अमिट यादों के रूप में देख रही है. गुस्सा, मेहनत, संघर्ष और घुटन के बादल इन ३३ लोगों के प्रकाश में आगमन के साथ ही हर्ष और उन्माद में बदल कर आशा, प्रयास और कर्म के योग को जैसे व्याख्यित कर रहे हों !

मैं जब कभी शावर लेते समय आँखे बंद कर लेता हूँ तो अन्धकार और पानी के वेग से घुटन सी होने लगती है और ये पल की घुटन बड़ी असहनीय होती है,  और कभी चद्दर में मुंह बंद हो जाए और सांस न  ले पाने के कारण जो पीड़ा होती है उससे हम कुछ ही पल में कितने विचलित हो जाते हैं ! कभी दोस्तों से कुछ ही दिन ना मिलने, तो कभी घरवालों से कुछ दिन ना रूबरू हो पाते हैं तो मन कितना विचलित हो जाता है, कभी विडियो कांफ्रेंस करते हैं तो कभी फ़ोन पर बात और ज्यादा दिन हो जाएँ तो तुरंत मिलने चले जाते हैं,  एक कमरे में घुटन होती है तो बाहर घूमने चले जाते हैं ,  रात के बाद दिन और दिन के बाद रात के आगमन से अपने आपको तरोताजा अनुभव करते हैं ! इन सब बातों को चिंतन में लाते हुए इन ३३ लोगों ने जो हिम्मत दिखाई है और जो जीवन का संघर्ष पल पल ६९ दिन तक झेला है वो अविश्वसनीय है,  रोमांचकारी है !

अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि  - Miners, rescuers "inspired the world"

लुईस उर्जुआ अगस्त में एक दिन जब अपनी शिफ्ट सुपरवायिजर कि ड्यूटी के लिए खदान में घुसे तो यही सोच रहे थे कि १२ घंठे बाद बाहर आकर रोजमर्रा के काम निबटाउंगा, पर कुछ ही घंटों में वो अपने अन्य साथियों के साथ मौत के मुंह में थे ! ईश्वर की दया से २३०० फीट कि गहराई पर एक टनल थी और ये सब के सब इस घुप्प अँधेरी सुरंग में जा गिरे ! लुईस उर्जुआ ने अपने अनुभव के सहारे ७०  दिन तक हर किसी का साहस और मनोवैज्ञानिक हौसला  बनाए रखा, उन्होंने चार - पांच लोगों के समूह बनाकर एक सामजिक वातावरण बनाने की कोशिश की !  आज ६९ दिन के बाद लुईस उर्जुआ सबसे बाद में खदान से बाहर निकले, एक एक करके सब लोग बाहर आते गए और अंत में एक सच्चे लीडर कि भाँती सबसे बाद में खुद बाहर निकले ! इन सबके बीच उन ६ लोगों की भी प्रशंशा करनी होगी जो इन लोगों को बाहर निकालने २३०० फीट नीचे तक गए और अभी  उर्जुआ को बाहर निकालने के बाद भी वहीं है, अभी उन्ही के बाहर आने का कार्य चल रहा है !  ५४ वर्ष के उर्जुआ ने कभी हिम्मत नहीं हारी और ना ही अन्य साथियों के हौसले पस्त  होने दिए !  बाहर आने के बाद उर्जुआ के शब्द थे - 'मुझे चिली का नागरिक होने पर गर्व है'

उर्जुआ

उर्जुआ की पूरी टीम को हिंदी ब्लोग्गिंग की तरफ से सलाम और शुभकामनायें ! 

जब नहीं पता था किसी को कि कोई जिन्दा भी है
जब इनको भी नहीं पता था कि कोई बचाने आएगा
उस समय बस जिन्दा रखा
सकारात्मक सोच ने
आशा ने, विश्वास ने
कर्म का पाठ
आस्था के संस्कार
इसी दिन के लिए तो
हमें पढाये जाते हैं
और आभाष देते हैं
मुझे मानव होने पर गर्व है आज !!!

और आज जब ये जिन्दा आ गए हैं तो मीडिया के लोग इन पर एक एक साक्षात्कार के लिए किसी भी राशि कि धनवर्षा के लिए तैयार हैं , इनको  कुछ दिनों के लिए इनके परिवार के साथ अकेला छोड़ दो - यही निवेदन है !!  मैं अश्रुमय आँखों ने इन सबके संघर्ष और प्रयास के सामने नतमस्तक हूँ,  एक जीवंत पाठ पढ़ने वाली ये घटना जीवन को स्फूर्ति से जीने और सदा कर्मशील रहने की प्रेरणा देती है !

अज्ञातवास पूरा हुआ !!  'mission accomplished'



मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010

कई महीनों से चिली के खदान में फंसे लोग आज बाहर आ रहे हैं !! चलो दुआ करें !

7  सितम्बर को एक मैंने दक्षिण अमेरिकी देश चिली की एक खदान में कुछ लोगों के फँस जाने के बारे में लिखा था,  ३३ लोग तकरीबन २३०० फुट नीचे बिना किसी दैनिक बुनियादी सुविधा के उस अन्धेरे में महीनों तक कैसे जिन्दा रह रहे होंगे,  मुझे तो सोच कर ही डर लगने लगता है!  मैं लगातार इनको बाहर निकालने के प्रयास की प्रगति के बारे में पढ़ रहा था, हम सबकी दुआओं और अन्दर फंसे लोगों के संबल का असर है की जल्दी ही ये लोग  बाहर आ सकेंगे.  ऐसा कहा जा रहा है कि इनके पास तक का रास्ता बना लिया गया है और अब जल्दी ही इनको बाहर लाने कि प्रक्रिया शुरू की जायेगी.  ३० लोगों को एक एक से बाहर आने में काफी समय लगेगा !

रायटर पर इस समाचार की प्रतिक्रिया लोगों में कुछ इस तरह से थी -
"WELCOME BACK FROM HELL!!!!
no one human being should never get down to that hellhole, ever!"

"THE GLOBAL HEART IS TICKING AND WAITING FOR YOU ALL, GUYS!!!
WELCOME BACK TO THE LIGHT!"

यहाँ इनके बारे में और पड़ा जा सकता है !  इन लोगों को हम सब की प्रार्थनाओं की जरूरत है, आओ चलें इन सबके  सकुशल बाहर आने के लिए  ईश्वर से कामना करें !

और अभी अभी टीवी पर दिखाया जा रहा है की जल्दी ही प्रथम व्यक्ति बाहर आने वाला है !  अभी टीवी चालू किया तो देखा की यहाँ अमेरिका में सारे चैनल इसका लाइव प्रसारण  कर रहे हैं !

लाइव ब्लॉग - http://ac360.blogs.cnn.com/category/live-blog/
http://www.cnn.com/ पर बाहर निकालने की प्रक्रिया को लाइव देखा जा सकता हैं जहाँ पर एक व्यक्ति को कैप्सूल के अन्दर भेजा गया है !  बहुत ही उच्च तकनीक का उपयोग करके ये सुरंग फंसे हुए लोगों तक बनायी गयी है - मुझे ख़ुशी है के चलो मानव के कुछ अनुसन्धान आज काम आ रहे हैं नहीं तो इन लोगों का बच पाना संभव नहीं था !! हर तरह से इन लोगों का विशेष ध्यान रखा गया - वो क्या खाएं , मानसिक रूप से कैसे स्वस्थ और खुश रह सकें , कैसे  एक सामाजिक व्यवस्था अन्दर बनायीं जा सके और कैसे सूर्य जैसा प्रकाश उन्हें उपलब्ध कराया जा सके , इन सब बातों पर विशेष ध्यान दिया गया और साथ ही कैसे एक दूसरे से या अन्दर के वातावरण से  दूषित होने से बचा जाये  - इन सब बिन्दुओं पर लगातार ध्यान रखा गया !

चलो  अब आ रहे हैं वो अन्धकार से प्रकाश की और !!

मंगलवार, 7 सितंबर 2010

वो होंगे कामयाब …

जब मैंने टाइम पत्रिका में कुछ दिन पहले एक लेख पढ़ा तो मैं भय के मारे, घुटन के मारे काँप रहा था, एक सिहरन सी थी शरीर में !

देश – चिली,

स्थान - एक कॉपर और सोने की एक ध्वस्त खदान

_48847299_san_jose_mine_464इस खदान में कुछ दिन पहले एक हादसा हुआ और अनुमान लगाया गया कि ३० लोग जो खदान में काम करते थे, खदान धसने की वजह से मारे गये हैं, पर कुछ दिन बाद पता चला कि ये लोग २३०० फुट नीचे बने एक चैम्बर में सुरक्षित हैं, १० मीटर  images 5 मीटर के इस तलघर में जहाँ रोशनी और हवा से दूर केवल ८५ डिग्री फार्नेहाईट का घुटन भरा माहौल है बस !

अब बताया Chile Mine Collapseजा रहा है कि ये लोग बाहर निकाले जा सकते हैं,  पर इसमें ३ से ४ महीने लग सकते हैं क्योंकि जमीन के अंदर इतना लम्बा सुरक्षित मार्ग उस तलघर तक बनाना एक आसान काम नहीं है। चिली की सरकार और फँसे हुए लोगों के घरवालो के साथ-साथ पूरे विश्व की दुआएं उनके साथ है, ये एक दुर्गम रास्ता है और कठिन समय जिसके सोचने से ही शरीर में कम्पन सा होने लगता है पर फिर भी हौसला कहिये कि अंदर से ६ इंच के एक पाईप से इनके लिए भेजे गये कैमरा में इन लोगों ने जो आत्मविश्वास और जीने की ललक दिखाई है वो मुझे उस महान गाने की याद दिलाती है जो बचपन में हम गाते थे -

‘हम होंगे कामयाब एक दिन -

हाँ मन में हैं विश्वास

पूरा है विश्वास

हम होंगे कामयाब एक दिन’

 

रात और दिन, कोई प्रकाश नहीं, कोई मलमूत्र की विशेष व्यवस्था नहीं, और ऑक्सीजन की कमी जो अनेक रोग पैदा कर दे, कुछ लोग डायबिटिक भी हैं तो कुछ लोग दिल के भी कमजोर होंगे, कुछ को परिवार की याद कमजोर करेगी तो कुछ को एक हल्का सा शारीरिक गतिरोध जीने के लिए अवरुद्ध करेगा पर इनकी आशा , हमारी प्रार्थना और ईश्वर की छत्रछाया जरूर इनको बाहर लाएगी।

चलो हम सब इन सबके स्वास्थ्य, मनोबल और जीवन के लिए प्रार्थना करें !!

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वैसे तो अमेरिका की गली गली में योग के केंद्र खुले हुए हैं और यहाँ के एकाकी लोग अपने आप को इन केन्द्रों में उर्जा और शांति कि खोज में ले जाते हैं,  शायद इनको शांति योग से ज्यादा यहाँ मिलता एक सामाजिक वातावरण देता है, इसी तरह का एक योग केद्र न्यू यार्क में है जहाँ हँस योग कराया जाता है , बोर्ड पर कुछ १-२ मन्त्र लिख दिए और बस् लोग पागल, जैसे हम भारतीय पागल है पश्चिमी सभ्यता के अनुकरण में, वैसे ही यहाँ के लोग इस दिखावी योग से भारतीयता में ढलकर शांति पा रहे हैं!

एक लेख था,  दवाईयों की लत के बारे में ! एक माँ जिसके बच्चे को कैंसर थी, एक दवा दी गयी जिसको खाने से उसको आराम मिलाने लगा, शायद कुछ सालों में कैंसर का खतरा कुछ कम हुआ पर उस बालक को दवाई की लत पड़ गयी, और वो फिर उस दवाई या अन्य ड्रगों के लिए परेशान रहने लगा, माँ कहती है कि इससे तो अच्छा कैंसर था कि कम से कम लोग सहानुभूति तो रखते थे, पता नहीं दवाईयों के कुम्भ में ऐसे कितने बालक खो रहे होंगे !  दुनिया में ओवरडोज की वजह से  हो रही मौतों कि संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है, ईश्वर रक्षा करे सबकी !

पाकिस्तान के अस्तित्वा को खतरा सा दिखता है हाल में आई पानी और आतंकवाद की बाढ़ से, इस पडोसी को भी ऊपर लिखा गीत गाने की आवश्यकता है और हमें जितनी हो सके इनकी सहायता और प्रार्थना करनी चाहिए, खुद के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आसपास का वातावरण अच्छा होना अनिवार्य है !