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शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010

मैं खुश हूँ, कई पिता हैं तो क्या हुआ !!

 

क्या आपको पता है कि मेरे स्कूल बस में मेरे साथ जाने वाले कुछ बच्चे हैं जो जिनके या तो कई पिता हैं या फिर कई माँ ! निकुंज ने जब ऐसा बोला तो मुझे लगा कि कौन इतने गर्व से ये बात बताएगा, कोई बच्चा मजाक कर रहा होगा, पर एक दिन जब एक बच्चे की नानी मेरी पत्नी से बात कर रही थी तो वो भी बड़े गर्व से बता रही थी  कि ये लडका बड़ा भाग्यवान है जिसको दो दो पिताओं का प्यार नसीब होता है !

ये हुई न बात !  पर  इस बात को एक पश्चिम की संस्कृति की झलक समझ कर छोड़ना उचित नहीं, कुछ ठहर कर सोचते हैं इस बारे में !

नाम – डोमिनिक

खुश है बहुत  - माँ तो एक ही है पर पिता दो हैं, दोनों पिताओं का असीम प्यार मिलता है, और दोनों से ही हर मौके पर तोहफे इत्यादि !  पहला पिता उसकी माँ का बॉय फ्रेंड था, दोनों साथ रहे - कुछ दिन बाद डोमिनिक का जन्म हुआ पर विचारों में भिन्नता आने लगी कुछ दिनों में और दोनों अविवाहित अलग अलग हो गये, डोमिनिक की माँ कुछ दिन बाद डोमिनिक के वर्तमान पिता से मिली और कुछ ही दिन पहले दोनों से शादी कर ली, डोमिनिक शायद अभी ७-८ साल का होगा। बकौल डोमिनिक की नानी उसका बायोलोजीकल पिता भी बहुत अच्छे स्वभाव का है और हर मौके पर अपनी जिम्मेदारी को निभाना नहीं भूलता और वर्तमान पिता भी डोमिनिक को अपना मान उसे पूरा प्यार और दुलार देता है - दोनों ही डोमिनिक को बारी बारी से समय देते हैं और वो स्वतंत्र है जहाँ चाहे, जब चाहे कहीं भी जाने के! उसकी नानी के हिसाब से विचारों का मिलन नहीं है तो फिर साथ क्या रहा जाये, इससे तो अच्छा है दोनों की सहमती से वही करो जी व्यक्तिगत रूप से बढ़िया लगे और रिश्ते भी खराब न हों ! 

क्या रिश्ते इस तरह से कायम बने रह सकते हैं, पर हो सकता है कि डोमिनिक आपसी झगडों की कलह से बच गया हो जो उसके माता पिता के विचारों में भिन्नता की वजह से होते रहते, निश्चित ही ये कोई भैरन्ट समाधान तो नहीं पर कामचलाऊ तो है ही !

नाम – कैली

खुश है बहुत - शायद ये अपने पिता के साथ रहती है और इसके भी कई पिता और माँ हैं,  खिलौने और पार्टियों की  धूमधाम रहती है हर मौके पर क्यूंकि हर कोई उसको बहुत चाहता है ! उसके घरवालों को रिश्तों की इस कोम्प्लेक्सिटी पर कोई परेशानी नहीं !

शायद बाकी ८० प्रतिशत के एक माँ और एक पिता ही हो !

marriage

अब मैं रुख करता हूँ कुछ त्रासदियों पर जो मैं देखी हैं भारत में !  एक लडकी की शादी होती है १७ साल की उम्र में ! २-३ साल शादी के गुजरते हैं, सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा है. दोनों परिवार, पति, पत्नी सब लोग खुश हैं , पर जैसे दिन के बाद रात आती ही है,  खुशियाँ भी ज्यादा दिन तक स्थायी नहीं रहती !  लडकी गर्भवती हो जाती है, और भी खुशियाँ !  एक दिन अचानक किसी दुर्घटना में पति की म्रत्यु हो जाती है, माँ ने होनहार लड़का खो दिया और पिता ने जैसे अपने सपने खो दिए हों !  पत्नी ने तो जैसे अपना भविष्य ही खो दिया,  सब कुछ खो दिया , गम में गर्भ भी साथ नहीं दे पाया और गर्भपात का असहनीय दर्द जैसे उससे बचाखुचा जीवन भी छीन ले गया !  कुछ दिन हुए, परिवार वाले अपनी अपनी राह पर हैं,  भाई बहिन सब उन्नति कर रहे हैं और फिर से खुशियाँ परिवार में वापिस !! पर कोई तैयार नहीं उस लडकी की दूसरी शादी के लिए जिसके सामने जिंदगी का अभी तीन चौथाई से ज्यादा हिस्सा बाकी पड़ा है,  वो बस बेबसी, लाचारी में अपना पूरा जीवन (हिंदू धर्म के अनुसार) जीयेगी !  भले ही राजा राममोहन राय ने विधवा विवाह आजादी से पहले शुरू करवाने की मुहिम शुरू कर दी थी पर क्या वो जागरूकता हमारे गांवों तक या पुरुषीय मन तक पहुँची हैं ?  बाद में न पिता पक्ष उसकी तरफ देखता है और ना ही ससुराल पक्ष ! वो बेसहारा बस जिंदगी को कैसे भी काटने पर मजबूर है , काश वो एक दुर्घटना ना हुई होती , काश वो दिन समय के पहियों के नीचे न आया होता !  कुछ दिन बाद जमीन जायदाद और सब कुछ  उससे ले लिया जाता है क्यूंकि न तो पति है इस दुनिया में और न कोई बच्चा है !  जीवन जैसे एक अभिशाप बन गया हो, श्राप में जीने के लिए हमारे पाखंडों ने उसे मजबूर कर दिया ! उसकी मानवीय भावनाओं, सम्वेदनाओं की किसी ने कोई क़द्र नहीं करी, सबने एक बार आँसू बहाकर उसे जिंदगी भर आँसू पीने के लिए मजबूर कर दिया !

ऐसे कई दर्दनाक और अभिशप्त उदहारण मैंने देखे हैं और आपने भी अनुभव किये होंगे!  एक बार के लिए अपने मनुष्य होने पर भी पीड़ा होने लगती है !

इन दो विस्तृत पहलुओं पर ध्यान देने के बाद यही निष्कर्ष निकलता है कि तर्क से हर चीज सही या गलत नहीं सिद्ध की जा सकती,  गलत है अति - ‘अति सर्वत्र वर्जते'  - अति वर्जित है जब आप संस्कृति छोड़ पूरी तरह पश्चिम के रंग में रंगकर रसिया हो जाते हैं और अति वर्जित है जब आप संस्कृति के कुएं पर पड़े पड़े बाकी दुनिया को नजरअंदाज कर देते हैं !