हिंदी - हमारी मातृ-भाषा, हमारी पहचान

हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अपना योगदान दें ! ये हमारे अस्तित्व की प्रतीक और हमारी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है !

गुरुवार, 10 जून 2010

एक आत्मीय ब्लॉगर मिलन...कनाडा में समीर लाल के साथ एजेक्स शहर में ...

कनाडा की हर यात्रा अपने आप में एक अद्वितीय यादों की महक छोड़ रही है.  पिछली कई पोस्ट मोंट्रियल की यात्रा पर केन्द्रित थी और फिर वापस शिकागो चला गया था...पिछले सप्ताह व्यस्त कार्यक्रम की वजह से लाल परिवार से मुलाक़ात नहीं हो पायी थी.  आज टोरंटो एअरपोर्ट पर बैठा में मंगलवार की यादों के मोतियों को ब्लॉग के धागे में पिरोने बैठा हूँ.

सोमवार को एक हमने एक अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर मीट का प्लान बनाया. मैं मंगलवार को भारत का नागरिक अमेरिका से  कनाडा के एजेक्स शहर में रह रहे समीर लाल और उनकी फॅमिली को मिलने पहुंचा.   वैसे काम के सिलसिले में इधर आना हर सफ्ताह हो रहा है,  सोमवार को आकर गुरुवार को घर.  मेरी बहुत दिनों से उत्कंठा थी की समीर जी से मिला जाए.  मंगलवार को सुबह समीर जी ने पूरा स्टेप बाई स्टेप ईमेल भेज दिया, कैसे टोरंटो से उनके घर का रास्ता तय करना है, बस जैसे वो हाले दिल कविता में कहते जाते है, मैं वो स्टेप पढ़ते पढ़ते पूरा राश्ता बिना किसी परेशानी के तय कर गया.

६:१८ शाम की ट्रेन ऑफिस से १० मिनट पैदल चलने पर मिल गयी थी और एजेक्स ट्रेन स्टेशन पर प्रभु स्वयं कार लेकर पार्किंग लौट में खड़े थे.  गले मिले तो बड़ा ही आत्मीय सुख मिला.  जैसे की बिछड़े भाई मिल रहे हों.  जैसे ही घर पहुंचा साधना जी ने भी गर्मजोशी और आत्मीयता से स्वागत किया.   हलकी फुल्की बातें,  ब्लॉग की शुर्खियाँ और आसपास के बारे में बात करते रहे.  लाल परिवार के बारे में जाना,  और अपने को भी परिवार में ही शामिल पाया.  गपशप चलती रही, बीच बीच में साधना जी के बनाए समौसे और भारतीय नमकीन के चटखारे चलते रहे.  मौका मिलते ही रास्ते में लिखी एक कविता सुनायी मैंने ...

बड़ा था उत्साह हमें आपसे मिलने का
जानने का, बतियाने का
मंद मंद मुस्काने का

धुंध धुंआधार से निकली
उडती तश्तरी में उड़ने का
रूबरू होने का एजेक्स घूमने का

और क्या लिखूं
हिंदी के लिक्खाड़ के सामने
चला आया गुर भी सीखने ब्लॉग का

नीचे बेसमेंट  में बैठे रहे,  हिंदी ब्लॉग के विकास के बारे में चर्चा चलती रही. समीर जी का पुस्तकालय देखा,  हिंदी के लिक्खाड़ ऐसे ही नहीं बन गए,  बहुत पढ़ते है.  में तो खैर जब तक रुका ...कुछ न कुछ सीखता ही रहा.  समीर जी की कुछ खूबशूरत रचनाएँ सुनी, जिनमें जमीनी हकीक़त और देश की सौंधी सौंधी खुशबू महक रही थी.  हम दोनों में ही देश की मिटटी की याद हर वक़्त, हर बात में झलक रही थी.  दोनों में क्या तीनों देश की याद और पुराने दिनों के सुनहरे दिनों को याद करते रहे. 

इसी बीच समीर जी अपने हस्ताक्षर सहित , मुझे अपनी कृति 'बिखरे मोती' भेंट की. समीर जी के काव्य संग्रह 'बिखरे मोती' से एक कविता की कुछ पंक्तियाँ इधर लिख रहा हूँ ...जिनमें देश जाते समय का और फिर जब लौटे है ..तब का दर्द झलक रहा है ....

समय कैसे पंख लगा कर उड़ गया
कल ही तो मैं घर आया
कल लौट के वापस जाऊंगा
कुछ यार मिले, कुछ बातों की
यादों की बरसातों की
उन गलियों को फिर से घूमा
जिसने मेरा बचपन चूमा ......
...................................
('बिखरे मोती'  से ....)

कुछ देर फिर हमने बात की अन्य हिंदी  ब्लोग्गेर्स और उनके योगदान के बारे में.  समीर जी अपने से पहले वाले ब्लोग्गेर्स का जिक्र और उनकी महत्ता को जरूर बताते हैं.  फिर उत्तरी अमेरिका में और कैसे हिंदी का प्रचार प्रसार किया जाए, के बारे में चर्चा चलती रही.  मैंने शिकागो में कवि सम्मलेन का प्रस्ताव रखा तो समीर जी ने पूरे सहयोग और अपने पुराने अनुभव के हिसाब से मार्गदर्शित किया.  कुछ फोटो भी खींचे गए इस बीच ...


डिनर का समय हो चला था,  सबने काव्य पाठ भी किया...विडियो या ऑडियो समीर जी पोस्ट करेंगे.  साधना जी ने एक बहुत ही बढ़िया रचना पड़ी.  उनके स्वर ने समीर जी की उस रचना में चार चाँद लगा दिए.  


चलो अब बारी थी छप्पन भोग से भी जो अच्छा खाना होता है उसकी.  साधना जी ने बहुत सारे पकवान तैयार किये थे.   फोटो में देखोगे तो खुद को रोक नहीं पाओगे  .....बहुत खाना खाया, जी भर के खाया !!


यहाँ इंगित करना चाहूँगा की समीर जी भी बहुत पहुंचे हुए रसोईये हैं.  सीक्रेट का भंडाफोड़ कर ही देता हूँ ... चिक्केन के अलावा जलोपीनो मिर्ची का एक व्यंजन ऐसा बनाया था की जीभ रो रही थी फिर भी खाए बिना मन मान ही नहीं रहा था.  जबरदस्त, मस्त मस्त, स्वादिष्ट !!  रात से ज्यादा असर सुबह दिखा -:)

ये रहे रसोई के रसूखदार प्याज काटते हुए :)....

आइसक्रीम, और मीठे मीठे आम खाने के बाद और थोड़ी देर बैठे ...फिर ट्रेन का टाइम हो चला था और इधर मेरी फ्लाईट उड़ने वाली है, इसलिए लिखना बंद करना पडेगा .....समीर जी की चिड़ियों से मिलने के बाद, ढेर सारी यादें समेट कर, ज्ञान लेकर, आत्मीय प्यार पाकर और एक बड़ा भाई पाकर हम लगभग अर्धरात्रि के समय स्टेशन की ओर चल दिए .....



और भी बहुत कुछ है लिखने को ....कुछ बाद में लिखूंगा समय की कमी है अभी ओर कुछ समीर जी की पोस्ट में आएगा ....इन्तजार करते रहिये ....

- राम फ्रॉम बिली बिशप एअरपोर्ट टोरंटो

38 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

मिलन की सचित्र जानकारी बढ़िया रही...आभार

Suman ने कहा…

nice

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

समीर जी के साथ मुलाकात की बधाईयाँ :)

Vivek Rastogi ने कहा…

एक ही सांस में पूरा पढ़ गये, और समीर जी के बारे में कुछ ज्यादा जानकर बहुत अच्छा लगा, अब तो आडियो और वीडियो का इंतजार है ।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बधाईयाँ जी!

ललित शर्मा ने कहा…

ब्लागर मिलन की शुभकामनाएं।
शुभकामनाएं

निर्मला कपिला ने कहा…

मुझे भी कैलिफोर्निया मे डा. अजित गुप्ता जी के साथ ब्लागर मीट की याद आ गयी। जब हम विदेश मे किन्हीं अपनों से मिलते हैं तो बहुत अच्छा लगता है समीर जी ने मुझे भी कहा था कि कनाडा हो कर जायें मगर मेरे पास समय नही था तस्वीरें भी बहुत अच्छी लगीं। धन्यवाद और शुभकामनायें

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

उत्कंठा बढ़ती जा रही है, समीर जी से मिलने की, घर में दबाकर भोजन करने की, उनकी लाइब्रेरी खंगालने की और फिर सुबह तक गपियाने की । अरे, कोई है स्पॉन्सरर !

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

मन मिलन तो चलते रहने चाहिए।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

भोजन से सजी टेबल का चित्र देख भूख लग आई।

H P SHARMA ने कहा…

नेह से पगी, फ़ोटो से सजी, मन से लिखी आपकी ये पोस्ट दिल को छू गयी.

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर ने कहा…

इस ब्लॉग के महारथी से हम भी मिलने को आतुर है भाई !

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

वाह आपने तो अपने साथ-साथ हमें भी समीर जी से उनके ही घर पहुंचा कर मिलवा दिया. धन्यवाद. लेकिन हर ब्लाग पर टिप्पणी का रस महकाने वाले समीर जी अभी तक यहां नहीं आए !

रंजन ने कहा…

क्या बात है... खाना गाना.. सब..

खुशदीप सहगल ने कहा…

जलोपीनी मिर्ची...
हाय हाय मिर्ची...
आपने अपनी पोस्ट से ही समीर जी के हाथ से बनी जलोपीनी मिर्ची का स्वाद जीभ तक पहुंचा दिया...

सभी कलाओं में सिद्धहस्त हैं अपने गुरुदेव...

जय हिंद...

shikha varshney ने कहा…

बहुत खूब रहा ये ब्लोगर मिलन एक दम जालोपिनो मिर्ची जैसा :)शुभकामनाएं

सुलभ § Sulabh ने कहा…

प्यार भरा पोस्ट बेशुमार

'अदा' ने कहा…

sameer ji na sirf ek sadhe hue rasoiye hain balki bahut hi sadhe hue insaan hain..mujhe bhi yaad aagaya unka subah subah mirchi kaatna.. :):)
bahut hi prem pagi post..
aabhaar aapka...

प्रभाकर पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुंदर वर्णन किया है आपने। मैं तो ब्राह्मण हूँ अस्तु खाने की ही सोंचता हूँ....आप जितने आत्मिकता से मिले उतनी ही आत्मिकता से सजी पोस्ट। पर हाँ एकबाक बताए देता हूँ अगली बार जाइएगा तो कुछ (भोजन) बचाकर हमें भी पार्सल कर दीजिएगा। समीरजी महराज के हाथ का बना भोजन खाने की इच्छा हो रही है।
कास यहाँ भी कोई ब्लागर मिलन होता और उसमें समीर जी कुक होते।।।

सादर। सादर आभार इस बेहतरीन पोस्ट के लिए।

भवदीप सिंह ने कहा…

आत्मीय मिलन ! बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

girish pankaj ने कहा…

achchhi rahi mulakat. dekhen ham log kab mil paate hai. sameer ji bharat aa jao, varnaa ab hame hi udhar aanaa padega. 10 ssal ka visa mila huaa hai. ek baar ho aaye hai, doosari baar bhi ho hi jayegaa. filhaal rochak post ke liye badhai bhaai.

राम त्यागी ने कहा…

मन गद गद हो गया इतने सारे लोंगों के बढ़िया से कमेन्ट पाकर ....!!

Indli ने कहा…

Your blog is cool. To gain more visitors to your blog submit your posts at hi.indli.com

rashmi ravija ने कहा…

समीर जी से इस नेह भरे मुलाकात का विवरण पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा...

राजेश स्वार्थी ने कहा…

समीर जी मिलने की गाथा बहुत आनन्द दे गयी.

ajit gupta ने कहा…

भला समीरजी से मिलकर किसे खुशी नहीं होगी? हम तो अमेरिका आकर और उनका निमंत्रण पाकर ही कनाडा नहीं जा पा रहे लेकिन उनसे कई बार फोन पर बात हो चुकी है। चलिए आपका मिलन बढिया रहा आपको बधाई।

देव कुमार झा ने कहा…

वाह वाह.... क्या खूब मजा किया गुरु......
उड़न दद्दा से प्याज भी कटवा लिया... खाना भी बनवा लिया.... गजब...

राम त्यागी ने कहा…

Dev Bhai ...still awake ?

Udan Tashtari ने कहा…

उस यादगार शाम की यादें हमेशा हरी रहेंगी. बहुत आनन्द आया तुम्हारे आगमन से. आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि यह मेल मुलाकात का सिलसिला बना रहेगा.

बढ़िया तस्वीरें लगी और देखा कि कुछ बात छिपा भी ले गये. :)

राम त्यागी ने कहा…

Thanks Sameer jee ...

MUKUL_Muses ने कहा…

4 me d best part was d dinner pic...truly delicious...:)

anoop joshi ने कहा…

jai ho aapki or sameer g ki.

khana dekhkar muh me paani aa gaya. sameer g ne banaya tha kya?

राम त्यागी ने कहा…

आप सब लोगों का स्नेह देखकर बढ़िया फील हुआ ...
ऐसी मुलाकातें होती रहनी चाहिये ...

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

समीरलाल जी से अंतरंग तरीके से मिलवाने का बहुत महत्वपूर्ण कार्य किया आपने। धन्यवाद!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आपके माध्यम से समीर जी से मिल कर बहुत आनंद आया...बहुत जीवंत फोटो दिखाए आपने...शुक्रिया...
नीरज

दिवाकर मणि ने कहा…

राम त्यागी जी, ब्लॉग-पोस्ट से इतर की एक बात पर ध्यान दिलाना चाहूंगा। ब्लॉगशीर्ष से ठीक नीचे आपने लिखा है- "हिंदी - हमारी मात्रभाषा, हमारी पहचान"। यहां "मात्र" की जगह "मातृ" उपयुक्त होगा। कृपया इस तरह की जाने-अनजाने की टंकण अथवा वर्तनी की गलतियां आप जैसे हिन्दीनिष्ठों के ब्लॉग पर देख कर वेदना होती है।

राम त्यागी ने कहा…

ठीक ध्यान दिलाया आपने, ये मेरी बहुत बड़ी गलती थी जो अब सही कर दी गयी है. बहुत बहुत धन्यवाद आपका दिवाकर !!

अनूप शुक्ल ने कहा…

रास्ते में भी कविता सोचकर लिखी। वाह! बड़े समर्पित कवि हैं जी आप।


विवरण पढ़कर मजा आया। खुश हो गये।