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रविवार, 14 नवंबर 2010

राजू याद आ गया आज बाल दिवस पर

 

सबसे महत्वपूर्ण दिन उनके नाम जो कल के नायक हैं, जो आज पौधे हैं और कल वृक्ष बन हमें छाया,  नेतृत्व और नया जीवन देंगे एक नयी सोच देंगें !

कल मैंने संयोगवस अपने कविता संग्रह ब्लॉग पर एक कविता बालक की उर्जा, उसके समर्पण के ऊपर लिखी थी -

 

एक बालक

खिलौने की तलाश में

अपनी मंजिल तलाशता

खोजता, उतरता, चढ़ता

सूर्य, चंद्र और आकाश

को भी पाने की अभिलाषा रखता

हर राह को उकेरता

आशामय हो निहारता

उद्वेलित हो मग्न रहता

किड्स

जब ज्येष्ठ को देखता

जीतने की आशा दोहराता

मंजिल पाने तक

प्रयासरत ही रहता

चींटी की भाँती

जीत कर ही विश्राम लेता !!! 

जहाँ मेरे पिताजी की पोस्टिंग है वहाँ पर एक गरीब परिवार था, बच्चों को पढाने की कोई व्यवस्था तो दूर,  एक रहने का ठिकाना भी नहीं था, पिताजी ने अन्य आर्थिक सहयोग के अलावा उस परिवार के एक बच्चे को अपने घर ले आये जिससे उसको शिक्षा का एक माहौल मिल सके, अब तो राजू परिवार के एक सदस्य जैसा ही हो गया है ! OgAAAKMltl_16hNxbIyPtIAHjulxbXHKANjmqPgFVFklCFxfKjYqbcHCFJItHTXrzgrSBR2nby0NnIW0q3yDZrDzIp4Am1T1UDwX_QNY_yWtCxN2nf5PMrynSpnO

आप भी किसी एक राजू को आगे बढाने का बीड़ा उठायें तो ये बाल दिवस मनाना सार्थक हो जाए !

कुछ दिन पहले दोनों बच्चों को एक दूसरे को नक़ल करते पकड़ा था ..उसी का ये विडियो बोनस में :)