हिंदी - हमारी मातृ-भाषा, हमारी पहचान

हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अपना योगदान दें ! ये हमारे अस्तित्व की प्रतीक और हमारी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है !

मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

जो शहीद हुए है उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी ....

छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले ने तो आज सुबह ही सुबह दिल दहला दिया, इस कृत्य की सभी भारतीयों को भर्त्सना करनी चाहिए। नक्सल आन्दोलन का ये कैसा वीभत्स रूप है ? ये तो किसी देश द्रोह से कम नहीं लगता ...आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां है जो हमारी सरकारें सुनियोजित और सुव्यवस्थित कार्यवाही करने से कतरा रही है। ससश्त्र आन्दोलन को फैलाने देना सबसे बड़ी गलती है और फिर आँख बंद करके अपने जवानो का ऐसे होसला टूटते देखना और भी बड़ी गलती और अस्मिता के लिए खतरा है ।

नक्सल आन्दोलन और उससे जुडी घटनाएं बहुत ही काम्प्लेक्स है पर क्या हम इसी तरह ये सब होते हुए देखते रहेंगे ? नक्सल आन्दोलन को निश्चय ही बाहरी देशो और हमारे भ्रष्ट नेताओ का समर्थन प्राप्त है पर ये तो हद ही हो गयी और जैसे की कहा जाता है की 'अति सर्वत्र वर्जते' तो अब तो जागो देश के मुखिया लोगो और हम जैसे आम आदमी लोगो ...भारत के वनों को इन बर्बर नक्सलियों से बचाना ही होगा, गरीब जनता को इनके चंगुल से निकालना ही होगा। भारत इन नक्सलियों के होते हुए आंतरिक रूप से सुरक्षित और सम्रद्ध नहीं हो सकता। मैं इस घटना की कड़े शब्दों में भर्त्सना करता हूँ और शहीद हुए जवानों और उनके परिवारों के लिए इश्वर से शांति की प्रार्थना करता हूँ ।

हमें इन जवानो की इस तरह मौत को भूलना न होगा और इनके परिवार को अकेला न छोड़ना होगा, अगर आप कोई भी किसी ऐसे परिवार की सहायता कर रहा है और में किसी तरह मदद कर सकता हूँ तो जरूर संपर्क करें , मैं अपने आपको सौभाग्यशाली मानूंगा।

असमय मौत से न समझना हम शांत हो जायेंगे
हम और भी मजबूत होकर कायरो को जबाब देंगे



2 टिप्‍पणियां:

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

of course, माओ की तानाशाही परम्पराओं के वाहक और चीन की गैर-कानूनी IED और हथियारों पर पलने वाले यह शैतानी दरिन्दे देशद्रोही, जनद्रोही सभी कुछ हैं. इन नरपिशाचों का दमन अब बिना देरी होना ही चाहिए.

Shekhar kumawat ने कहा…

असमय मौत से न समझना हम शांत हो जायेंगे
हम और भी मजबूत होकर कायरो को जबाब देंगे

bahut sundar


shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/