हिंदी - हमारी मातृ-भाषा, हमारी पहचान

हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अपना योगदान दें ! ये हमारे अस्तित्व की प्रतीक और हमारी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है !

रविवार, 5 दिसंबर 2010

वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता

यह पोस्ट मेरे पिताजी की अतिथीय पोस्ट है !

आज प्रतिदिन देखने में, सुनने में, समाचार पत्रों में पढने से यह अनुभव हो रहा है कि आज मंत्री से लेकर IAS अधिकारी भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं,  भ्रष्टाचार के कारण संसद नहीं चल पा रही है. अभी दूरसंचार मंत्रालय में अरबों रुपये के घोटाले का पता चला है जो एक वर्ष का रक्षा बजट होता था.  अभी कुछ माह पहले अरविन्द जोशी दम्पत्ति के यहाँ घर पर करोड़ों रुपये बिस्तर में छिपे पाए गए ! कारण स्पष्ट है कि भौतिकता की चकाचौंध में नैतिक मूल्यों में गिरावट आती जा रही है.

लालबहादुर शास्त्री, अटल जी ऐसे नेता थे जो नैतिक मूल्यों को महत्व देते थे आज अन्तरात्मा की आवाज न सुनकर केवल भौतिक सुविधाओं की ओर ध्यान दिया जा रहा है.

हर खाद्य पदार्थ जैसे बेसन, दाल, मिर्च, घी, खोया, तेल में मिलावट ही आ रही है. व्यापारी वर्ग अत्यधिक मुनाफे के प्रलोभन में नैतिक मूल्यों को तिलांजलि दे रहा है.

आज नैतिक मूल्यों के अभाव में परिवार टूट रहे हैं, अपने स्वयं के बच्चे, पत्नी के अलावा अन्य सदस्यों पर ध्यान न दिया जा रहा है. पहले नैतिक मूल्यों के कारण संयुक्त परिवार में सभी परिवार के सदस्य इकट्ठे रहते थे.

आध्यात्मिकता का अर्थ किसी विशेष सम्प्रदाय से नहीं है, आध्यात्मिकता का अर्थ है अपनी अन्तरात्मा की आवाज के अनुसार कर्त्तव्य पालन करना !  गांधीजी ने जीवन भर नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में स्थान दिया, वे हर कार्य अपनी अंतरात्मा की आवाज (नैतिक मूल्यों) के अनुसार करते थे. 

यदि जीवन में उच्च आदर्शों, नैतिक मूल्यों को महत्व दिया जाय तो परिवार से लेकर समाज एवं समाज से लेकर राष्ट्र हर क्षेत्र में चहुँमुखी विकास कर सकता है. आज न्यायालय भी नैतिक मूल्यों के अभाव में सही निर्णय देने में असमर्थ होते जा रहे हैं.

नैतिक मूल्यों के अभाव के कारण व्यक्ति के चरित्र में गिरावट आती जा रही है, आज अपराधों का ग्राफ हर वर्ष बढता जा रहा है. चोरी, डकैती, बलात्कार, हत्याएं इसलिए हो रही हैं कि व्यक्ति स्वयं के जीवन में उच्च आदर्शों, नैतिक मूल्यों को जीवन में स्थान न दे पा रहा है.    इसलिए बच्चों को आज अच्छे संस्कारों की नितान्त आवश्यकता है, हम अपने चरित्र से, व्यवहार से बच्चों के सामने नैतिक मूल्यों के उदाहरण प्रस्तुत करें.

आज के बच्चे ही कल के भविष्य हैं, अतः शिक्षा के साथ साथ नैतिक मूल्यों को जीवन में स्थान दें, हम हर कार्य अपनी अंतरात्मा एवं उच्च आदर्शों को ध्यान में रखकर करें.  परिवार बच्चों की प्रथम पाठशाला है अतः हर माता पिता को स्वयं का आचरण शुद्ध सरल-पवित्र, मर्यादापूर्ण रखना चाहिए. आज जो संस्कार बच्चों में स्थापित होंगे वो ही आगे चलकर देश और समाज के, परिवार के विकास में सहायक होंगे.

ईमानदारी, सत्यता, विवेक, करुना, प्रलोभनों से दूर रहना, पवित्रता ये नैतिक मूल्यों के आदर्श तत्व हैं, इन आदर्श तत्वों (सिद्धांतों) से जीवन में आध्यात्मिकता का जन्म होता है.  एक आदर्श परिवार या देश के संचालन हेतु परिवार के सभी सदस्यों, या देश के सभी नागरिकों में शिष्टाचार, सदाचार, त्याग, मर्यादा, अनुशासन, परिश्रम की आवश्यकता है. यदि जीवन में शिष्टाचार, सदाचार, अनुशासन, मर्यादा है तो परिवार और देश में शांति रहेगी.  यदि परिवार या राष्ट्र में स्वार्थ लोलुपता, पद लोलुपता बनी रहेगी तो परिवार भी टूटेगा, राष्ट्र भी  भ्रष्टाचार से प्रदूषित होता रहेगा.   इसलिए अहंभाव त्यागकर, स्वार्थ त्यागकर,  प्रलोभनों से दूर रहकर अपने व्यक्तिगत जीवन में विनम्रता, त्याग, परोपकार को जीवन में स्थान देना होगा तभी हम एक आदर्श परिवार का सृजन कर सकते हैं, एक आदर्श और खुशहाल राष्ट्र का स्वप्न साकार कर सकते हैं.

कन्फ्यूशियस के अनुसार - “यदि आपका चरित्र अच्छा है तो आपके परिवार में शांति रहेगी, यदि आपके परिवार में शांति रहेगी तो समाज में शांति रहेगी, यदि समाज में शांति रहेगी तो राष्ट्र में शांति रहेगी"

33 टिप्‍पणियां:

adbiichaupaal ने कहा…

naitikta punjiwad ke pet me aaram se so rahi hai, chikitsa ke pawitra peshe se naitikta ka bodh karane wala course hata diya gya hai

aajkal hindosta ke har nagar men
jo n hona chahiye wo ho raha hai

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

भ्रष्टाचार पर कोई सोशल स्टिग्मा ही नहीं! जो (भ्रष्ट और) धनवान है, वह सामाजिक प्रतिष्ठा पाता है। दहेज फ्लैश किया जाता है। बारातें उत्तरोत्तर भड़कीली होती गई हैं।
भ्रष्टाचार को गरियाया जाता है, पर जिसे देखो, वही चाहता है कि उसका लड़का थानेदार बन जाये टीटीई बन जाये। अधिकारी हो तो रिवेन्यू सर्विस में। नहीं तो नेता।
औरों के लिये नैतिकता और अपने लिये मलाई चाहता गया है यह समाज, उत्तरोत्तर! यही त्रासदी है।
चरित्र का पतन है यह। :(

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अन्तरात्मा को मार कर एक बार जब लोग भ्रष्टाचार में कूद जाते हैं तब उनकी प्यास भी अथाह हो जाती है, वापस लौटने का मार्ग ही नहीं सूझता है।
बिना मन और जीवन को संयमित किये भारत का निर्माण नहीं होने वाला।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पिताजी को प्रणाम।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत ही प्रेरक पोस्ट!

Rahul Singh ने कहा…

सुलझे विचार, सधी लेखनी, सहज और स्‍पष्‍ट अभिव्‍यक्ति, स्‍वागतेय.

डॉ टी एस दराल ने कहा…

उत्तम विचार ।
अफ़सोस आजकल ऐसे आदर्शवादी मनुष्य ढूंढें से भी नहीं मिलते ।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

सही बात है, परंतु समस्या नई पीढी को नैतिकता सिखाने से अधिक इस बात की है कि नैतिकता है क्या, उसका न्यूनतम स्वीकार्य पैमाना क्या हो। नैतिक अवमूल्यमन पर एक अर्ध-औपचारिक सभा में एक कम-नैतिक भारतीय के पुत्र अपने पिता की नैतिकता का डंका पीट रहे थे।

shikha kaushik ने कहा…

naitikta ka avmulayan hi aaj ki sabse badi samasya hai .gambheer mudde ko safaltapoorvak v sadhe shabdon me uthhaya hai .badhai

रचना दीक्षित ने कहा…

“यदि आपका चरित्र अच्छा है तो आपके परिवार में शांति रहेगी, यदि आपके परिवार में शांति रहेगी तो समाज में शांति रहेगी, यदि समाज में शांति रहेगी तो राष्ट्र में शांति रहेगी"
हमारे यहाँ तो कुछ भी अच्छा नही है प्रेरक पोस्ट
पिताजी को प्रणाम।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बेहतरीन .... उत्तम विचार हैं......

'उदय' ने कहा…

... behad anukarneey va prasanshaneey abhivyakti !!!

शिवम् मिश्रा ने कहा…


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

उत्तम विचारों का अनुकरण कठिन होता है, यह सुखद है कि हम महसूस कर पा रहे हैं कि यह विचार उत्तम है।

खबरों की दुनियाँ ने कहा…

अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"

Harman ने कहा…

behtreen post..

mere blog par bhi kabhi aaiye
Lyrics Mantra

ZEAL ने कहा…

“यदि आपका चरित्र अच्छा है तो आपके परिवार में शांति रहेगी, यदि आपके परिवार में शांति रहेगी तो समाज में शांति रहेगी, यदि समाज में शांति रहेगी तो राष्ट्र में शांति रहेगी"

पूर्णतया सहमत हूँ !

.

Meenu Khare ने कहा…

सुंदर भाव हैं।

Dorothy ने कहा…

अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.

आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.

Dorothy ने कहा…

अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.

आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.

Dorothy ने कहा…

अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.

आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.

Thakur M.Islam Vinay ने कहा…

nice post

दीप ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति,
आप ने लोगों को जगाने की अच्छी कोशिश की है
बहुत बहुत आभार

क्रिएटिव मंच-Creative Manch ने कहा…

उत्तम विचार
बहुत ही प्रेरक पोस्ट
सुन्दर प्रस्तुति
आभार

shiva ने कहा…

बहुत खूब !
कभी समय मिले तो हमारे ब्लॉग//shiva12877.blogspot.com पर भी अपने एक नज़र डालें

shiva ने कहा…

बहुत खूब जी !
कभी समय मिले तो हमारे ब्लॉग//shiva12877.blogspot.com पर भी अपने एक नज़र डालें

shiva ने कहा…

सुंदर रचना है
कभी समय मिले तो हमारे ब्लॉग//shiva12877.blogspot.com पर भी अपने एक नज़र डालें

शिवकुमार ( शिवा) ने कहा…

बहुत ही प्रेरक पोस्ट!

Richa P Madhwani ने कहा…

http://shayaridays.blogspot.com

S.N SHUKLA ने कहा…

बहुत सार्थक प्रस्तुति
, स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें .

web hosting india ने कहा…

This is a really excellent read for me. Must agree that you are one of the coolest bloggers I ever saw

daanish ने कहा…

उत्तम विचार
पावन आह्वान
मननीय आलेख ....

अभिवादन स्वीकारें .

अख़तर क़िदवाई ने कहा…

bahut hi umda vichaar rkhe aap ne