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मंगलवार, 29 जून 2010

कुछ तस्वीरें : टोरंटो (कनाडा) G20 सम्मलेन हिंसा और पुलिस के अत्याचार

 

पिछले हफ्ते टोरंटो में G20 और G8 सम्मलेन था, मैं शिकागो में था, पर जब सोमवार को टोरंटो में होटल में दाखिल हुआ, हर जगह पुलिस ही पुलिस को पाया. पूरा टोरंटो खाली पड़ा था, ऑफिस बंद थे, हर जगह काली ड्रेस पहने वर्दी में पुलिस के लोग दिख रहे थे, शाम तक धीरे धीरे शहर खुलना शुरू हुआ, पर धरने और प्रदर्शन जारी थे , और जारी था पुलिस का अत्याचार, कई लोग जेल में रात बाहर प्रताड़ित किये गए, टोरंटो को पुलिस छावनी बना दिया गया था , किलेबंदी कर दी गयी थी , फिर भी लोगों ने प्रदर्शन किया, कहीं कहीं पर ये प्रदर्शन हिंसात्मक रहे, लोगों  ने तोडफोड की कई जगह पर !

सोमवार को शाम को सारे रेस्तराओं ने बीयर सस्ती कर रखी थी, जिससे लोग बाहर आयें ! खैर कोई शहर रुकता नहीं , मंगलवार से सब कुछ सामान्य था. हाँ कुछ प्रदर्शन टीवी पर देख रहा था, लोग कह रहे थे कि टोरंटो के पुलिस प्रमुख को स्तीफा दे देना चाहिए. सारे पेपर भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की तस्वीरों से भरे पड़े थे.

खैर, जरूर कहीं न कहीं कुछ कमियां हैं G20 के उद्देश्यों में, इसलिए ही टोरंटो जैसे शांत और सुरक्षित शहर को भी युद्ध भूमि बनना पड़ा और शहर एक तरह से ८ दिन के लिए बंद सा ही हो गया था ….कुछ तस्वीरें आप देखें (दोस्तों और गूगल से ली गयीं हैं ज्यादातर)

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14 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

इससे तो अपना भारत लख गुना अच्छा है!
--
जय हिन्द!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

इससे तो अपना भारत लख गुना अच्छा है!
--
जय हिन्द!

निर्मला कपिला ने कहा…

ओह इतने बुरे हालात? पता नही दुनिया का क्या होगा/ शुभकामनायें

Voice Of The People ने कहा…

ऐसा भी होता है...G20 और G8 सम्मलेन मैं ??

anoop joshi ने कहा…

sar aap to jante honge ki har jagah G8 me ainse hi hota hai. lekin naya ye hai ki jabse G20 bhi saath me hone laga tab se virodh thoda kam ho gaya hai. ab india me bhi kuch sunayi nahi deta, is barein me. nahi to media pahele waha ka virodh dikhate the ab pradhanmantri ki yatra

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पता नहीं इतनी आग क्यों है वैश्विक प्रशासन के विरोध में ? भारत में हर ओर आग लगी है सिवाय विरोध की आग के ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

G20 और G8 सम्मलेन मै हमेशा ही ऎसा ही होता है, लेकिन यह तोड फ़ोड दुकानो की आम आदमी नही करता, ओर कारो को जलाना... यह भी आम आदमी नही करता.
धन्यवाद

girish pankaj ने कहा…

liktantra ke liye log khade hote hai, yeh achchhi baat hai. lekin hinsaa nahi honi chaahiye. aur pulis ...? idsakaa matalab hi daman kar denaa chahiye. ganeemat hai ki goliyaan nahi chaleen lashen nahi giree.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

दु:खद.

राम त्यागी ने कहा…

@शास्त्री जी, भारत में ये टूटफूट राजनीतिक गुंडों कि वजह से रोज का काम है इसलिए में सच बोलू तो भारत को इनसे बेहतर नहीं बोल सकता सुरक्षा और हिंसक प्रदर्शनों के लिए !

@अनूप , पता नहीं इंडियन चैनल क्यों नहीं ढंग का समाचार कवर नहीं करते ...वो केवल मसाला परोसते है और विदेशों को जन्नत दिखाते हैं हर हालत में !!

@प्रवीण जी, भारत में विरोध सिर्फ पैसे के गुंडे राजनीतिक हित साधने के लिए करते हैं. जिसमें सार्वजनिक संपत्ति कि तोडफोड आम है :(

राम त्यागी ने कहा…

@ भाटिया जी, यहाँ कनाडा में लोग बहुत नाराज थे और ये सब आम जनता ने ही गुस्से में किया ...हो सकता है कि हकीकत कुछ और हो

@गिरीश जी, इतना कुछ प्रदर्शन ही इतना प्रभाव कर गया, जो हमारे देश में लाशें गिरने के बाद भी नहीं होता ...

स्वाति ने कहा…

yatharth jankari ka shukriya..

Divya ने कहा…

khaufnaak tasveeren

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

देख कर रोंगटे खडे हो गये, तो असली स्थिति क्या होगी?
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किसने कहा पढ़े-लिखे ज़्यादा समझदार होते हैं?