हिंदी - हमारी मातृ-भाषा, हमारी पहचान

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सोमवार, 12 अप्रैल 2010

हिंदी राष्ट्रभाषा और राजभाषा - राष्ट्रभाषा ही तो राजभाषा होगी

बहुत बार ये जद्दोजहद और बहस की जाती है, साउथ के दोस्त लोग हिंदी को देश की भाषा के रूप में मानने को तैयार नहीं है, कानून में शब्दों के जाल ने हिंदी भाषा की व्याख्या को और भी विवादास्पद सा बना दिया है। इधर हमारे अंग्रेज दोस्त कभी पूछते है की भाई आप लोगो के इधर में राष्ट्रभाषा क्या है या फिर मुख्य भाषा क्या है तो हर कोई अपने क्षेत्र के हिसाब से उत्तर देता है और उस समय सामने वाले को पूरी तरह कन्विंस करना बड़ा मुस्किल होता है।

वैसे ये हमारे देश की विविधता का भी प्रतीक है पर माला में भी विभिन्न मोती के साथ एक मुख्य मोती भी होता है, घर में भी बड़ो और छोटो के बीच एक मुखिया होता है, यहाँ तक की सरकार में भी विभिन्न विभागों के होते हुए एक प्रधानमंत्री या फिर मुख्यमंत्री होता है तो फिर एक भाषा क्यों नहीं ? symbloic रूप से ही सही पर इसकी एक सही व्याख्या तो होनी ही चाहिए। आखिर राजभाषा तो वही होगी ना जो की राष्ट्र की भाषा है , तभी तो राज्य की भाषा को सब लोग समझ पायेंगे , तो इस हिसाब से तो हिंदी ही राष्ट्रभाषा हुई ? पर क़ानून ऐसा नहीं मानता - There's no national language in India: Gujarat High Court और ठाकरे जैसे , करूणानिधि जैसे लोग भी ऐसा नहीं मानते !

हिंदी ब्लोग्गेर्स को कुछ हस्ताक्षर अभियान चलाना चाहिए और उसको हमें तब तक जारी रखना होगा जब तक की एक मजबूत आवाज हमारे क़ानून बनाने वालो तक नहीं पहुंचती , अगर कोई पहले से ही ऐसा अभियान चल रहा है तो कृपया करके मुझे भी बताएं , अन्यथा हम एक न रुकने वाला अभियान शुरू कर सकते है। किसी भी केस में, मैं अपना हर तरह से सहयोग देने तैयार हूँ।

9 टिप्‍पणियां:

एस. कुमार ने कहा…

अति आश्यक है यह कार्य करना जहाँ तक हिंदी के जानने का प्रश्न तो गोवा तक हिंदी लगभग सभी लोग जानते हैं कमी है कि तो इसे आवश्यक अनिवार्यता बनाने की.

bhupeshbora ने कहा…

VERY GOOD ARTICLE.EVERY ONE SHOULD KNOW HINDI

स्वाति ने कहा…

बहुत ही अच्छा लेख, वाकई इसदिशा में बहुत कुछ किये जाने की जरूरत है ।

राम त्यागी ने कहा…

सभी लोगो का धन्यवाद ...बहुत कुछ किये जाने की जरूरत है , ये सही बात है !!

Udan Tashtari ने कहा…

मुझे ज्ञात नहीं कि ऐसा कोई अभियान चल रहा है. आप शुरुवात करें. मैं आपके साथ हूँ.

बेनामी ने कहा…

बहुत अच्चा लगा ये लेख देख कर. दिल खुश हो गया. लेकिन इक बात बताओ यार. अब इतनी मुश्किल के बाद भारत तरक्की कर रहा है. आधुनिक हो रहा है. तो तुम उसको रोकना चाहते हो? क्या तुमको पता नहीं के तरक्की के लिए सबसे जरुरी है के हम पश्चात्ये सभ्यता तो अपनाएं? अंग्रेजी बोले? Hindi is not cool man!! बोलो क्या जवाब है तुम्हारे पास? :-)

-- तुम्हारा मित्र भावदीप सिंह

राम त्यागी ने कहा…

भवदीप भाई मजाक का क्या जबाब दू :) ...हिंदी मात्रभाषा है और उसी तरह है जैसे आप मंदिर या गुरुद्वारा जाना कभी नहीं छोडते इसी तरह जाने अनजाने आप अपनी भाषा भी नहीं भूल पाते, ये आपको आपकी जड़ों से जोड़ती है, आप जब भी मन की बात बोलना चाहते हो अपनी मात्रभाषा ही उपयोग करते हो ...मैं अंगरेजी का विरोधी नहीं ..बस हिंदी के विकास का समर्थक हूँ. जैसे अंग्रेजी जरूरी है, हिंदी भी जरूरी है जड़ो से जुड़े रहने के लिए ! और विकास हिंदी में भी हो सकता है ....कुछ सीखो China , Germany इत्यादी से!

राम त्यागी ने कहा…

@समीर जी ..जरूर कुछ शुरू करते है ऐसा फिर तो ...

बेनामी ने कहा…

राम भाई बात तो तुम्हारी ठीक है. पर जहाँ तक मुझे पता है आज कल चीनी भी अंग्रेजी सीख रहे हैं.